Apr 08, 2026

यूपीसीएल ब्याज संशोधन: बिजली उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षा जमा रिटर्न में 1 प्रतिशत की गिरावट को समझें

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देहरादून। उत्तराखंड के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय खबर है। उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ताओं की सुरक्षा निधि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) पर दी जाने वाली ब्याज दरों में एक प्रतिशत की कटौती कर दी है। हालांकि, राहत की बात यह है कि उपभोक्ताओं के खाते में जमा पिछले वर्ष के ब्याज का पैसा 30 जून तक उनके बिजली बिलों में समायोजित कर दिया जाएगा। यूपीसीएल द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में उपभोक्ताओं को उनकी जमा जमानत राशि पर 6.50 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया गया था। लेकिन अब, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा बैंक दरों में किए गए बदलावों के मद्देनजर, यूपीसीएल ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस दर को घटाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है। यह नई दर उपभोग सुरक्षा (कंजंप्शन सिक्योरिटी) और सामग्री सुरक्षा (मैटेरियल सिक्योरिटी) दोनों ही प्रकार की जमा राशियों पर लागू होगी।

उपभोक्ताओं को ब्याज की राशि के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। यूपीसीएल ने स्पष्ट किया है कि ब्याज की गणना कर उसे 30 जून तक आने वाले बिजली बिलों में 'एडजस्ट' यानी समायोजित कर दिया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं के बिल की कुल राशि में ब्याज के बराबर की कटौती हो जाएगी। नियमों के अनुसार, यदि किसी उपभोक्ता की सुरक्षा निधि (Security Deposit) निर्धारित मानक से कम हो गई है, तो ब्याज की राशि का उपयोग सबसे पहले उस कमी को पूरा करने के लिए किया जाएगा। सुरक्षा निधि की कमी पूरी होने के बाद यदि कोई शेष राशि बचती है, तो उसे ही बिजली बिल की देय राशि में घटाया जाएगा। यूपीसीएल ने स्पष्ट किया है कि ब्याज का लाभ केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को मिलेगा जिन्होंने सुरक्षा निधि का भुगतान नकद, चेक, डिमांड ड्राफ्ट या ऑनलाइन माध्यम से किया है। जिन उपभोक्ताओं ने सुरक्षा निधि बैंक गारंटी या 'लेटर ऑफ क्रेडिट' के रूप में जमा की है, उन्हें इस पर कोई ब्याज नहीं दिया जाएगा। यदि कोई उपभोक्ता वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले अपना बिजली कनेक्शन स्थायी रूप से कटवा लेता है, तो उसे उसके अंतिम बिल के समय तक की अवधि का नियमानुसार ब्याज प्रदान किया जाएगा। यूपीसीएल के इस निर्णय से प्रदेश के घरेलू और व्यावसायिक, दोनों श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ेगा।