नई दिल्ली। पाकिस्तान की ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट हिना बलोच का एक सनसनीखेज दावा इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा है कि पाकिस्तान में करीब 80 प्रतिशत लोग समलैंगिक हैं, जबकि बाकी 20 प्रतिशत लोग बाइसेक्शुअल हैं। हिना का कहना है कि समाज, धर्म और परिवार के दबाव के कारण लोग अपनी असली यौन पहचान को छिपाकर रखते हैं। 1 अप्रैल को दिए गए एक इंटरव्यू में हिना बलोच ने समलैंगिकता को पाकिस्तान का ‘खुला रहस्य’ बताया। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी अपनी पहचान को स्वीकार नहीं करती, क्योंकि उन्हें सामाजिक बहिष्कार, अपमान और हिंसा का डर रहता है। उनके मुताबिक पाकिस्तान में पूरी तरह ‘स्ट्रेट’ होना बेहद दुर्लभ है। उन्होंने यह भी कहा कि लोग अक्सर अपनी पहचान से इनकार करते हैं और इसके पीछे धर्म व संस्कृति का हवाला देते हैं। हिना बलोच के अनुसार यह वास्तविकता समाज में मौजूद है, लेकिन इसे खुलकर स्वीकार नहीं किया जाता। उनके मुताबिक स्त्रैण माने जाने वाली चीजों को करना लोगों को पसंद है, लेकिन ज्यादा चिंता इस बात की रहती थी कि परिवार या समाज से अपमान और हिंसा का सामना न करना पड़े। अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उनके लिए यौन पहचान से ज्यादा जेंडर एक्सप्रेशन बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की ज्यादा चिंता थी कि मैं लिपस्टिक कैसे लगाऊं और परिवार से इसके लिए गालियां न सुनूं। मैं कैसे फेमिनिन कपड़े पहनूं, ज्वेलरी पहनूं और पिटाई से बचूं। उन्होंने पाकिस्तानी परिवारों, पड़ोसी और समाज के बारे में हैरतअंगेज खुलासे किए।
कौन हैं हिना बलोच?
खबरों के मुताबिक हिना बलोच का बचपन कराची में बीता, जहां उन्होंने पाकिस्तान के ख्वाजा सिरा (थर्ड जेंडर) समुदाय का हिस्सा होने की जटिलताओं का सामना किया। वह सिंध मूरत मार्च की सह-संस्थापक भी रही हैं और ‘औरत मार्च’ में भाग लेकर ट्रांसजेंडर व अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की मुखर वकालत करती रही हैं।
समाज में खुलकर जीने का फैसला
हिना बलोच ने पाकिस्तान में ख्वाजा सिरा समुदाय की स्थिति पर भी प्रकाश डाला। उनके अनुसार समाज उनके सामने सिर्फ तीन रास्ते छोड़ता है, भीख मांगना, सेक्स वर्क करना या नाचना। लेकिन उन्होंने इन सीमाओं को स्वीकार करने से इनकार किया और अपनी असली पहचान को अपनाते हुए एक ऐसे समाज में खुलकर जीने का फैसला किया, जहां हर कदम पर खतरा मौजूद था। इन परिस्थितियों के खिलाफ उन्होंने सक्रिय रूप से आवाज उठाई और जेंडर तथा अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करना शुरू किया। हिना ने आगे बताया कि वह पाकिस्तान में यौनिकता से जुड़े उस खुले रहस्य पर बात करती हैं, जिसे लोग खुलकर स्वीकार नहीं करते। वह औरत मार्च के दौरान प्राइड फ्लैग उठाने के बाद झेली गई खतरनाक प्रतिक्रियाओं का जिक्र करती हैं। उन्होंने बताया कि आवाज उठाने के दौरान उन्हें सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अगवा किए जाने जैसी भयावह घटना से गुजरना पड़ा। उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ यौन अत्याचार किया गया। इसकी वजह से उन्हें पाकिस्तान छोड़ना पड़ा। बाद में उन्हें SOAS University of London में स्कॉलरशिप मिली और उन्होंने यूनाइटेड किंगडम में शरण ली। हालांकि हिना की स्थिति में फिर भी सुधार नहीं आया।
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